Friday, October 19, 2018

When Will Government Take Lessons From Accidents and Take Preventive STEPS

About hundred families suffered loss due to fault of all organiser of Durga Puja near Rail lines including that of administration and railways who completely ignored unlawful activity taking place in their command area. How administrative officers and railway staff remain in dark for such s long period that organiser of Puja carry out their act loudly without getting written permission from them. It is absolute  negligence  on their part. 

I am very much sure that media men will cry on their TV  channels for two to three days, politicians  will play mutual blame game and police officers will play fantastic  drama for a few days but none of guilty persons will be punished and none will be held accountable and responsible  for such large scale killings of innocent  men and women for unlawful act of organisers of Durga Puja.

I however expect that not only Punjab Government  but all state governments will at least take lesson from the accident and formulate adequate and strict rules in this regard and ensure their strict compliances in future at least to stop  recurrences of such accidents. If needed central government should also take lesson from the said accident and force concerned authorities to take all preventive  steps to ensure that such accidents  do not take place in future.

It is fortunate that the accident took place in a state where Congress Party is in power, otherwise politicians  like Rahul Gandhi and Kejriwal  could have saught resignation of PM Mr Narendra Modi and media could have executed Modi for lapses of administration.  God bless Modi. 

So far as officers in railways and administrative offices are concerned I have no hesitation in saying  that they are not at all watchful of their assets and they are defaulting  in discharging  thrir duties regularly without facing any punitive  action. This is why people encroaches into their land and build house and shops and enjoy it for years and decades . No action is taken against persons who have taken unlawful  possession of their land and who carry our unlawful  activities in their command area for years and decades.

No permanent processes are in place which can guarantee non happening of such unlawful  possessions. It appears mischievous and ridiculous when they carry out a campaign to remove encroachment from road or from railway land  for a day or two in few years.  They do so for the sake of doing so or to torture their personal enemies or to please some politicians. They never bother safety of government land or that for compliance of existing laws and rules. 

Sometimes we are forced to conclude that there is no government and we are living in anarchy.

Fate of public banks, public sector undertakings, government  departments and judiciary  has therefore not improved despite numerous frauds and losses caused to taxpayers. They too did not take lessons from accidental or mischievous  acts of evil persons. This is why health of all public offices is bad , moving from bad to worse and finally causing unbearable loss after loss to public excheqer. 

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A person has expressed nicely about the said accident . I am reproducing  the same here-in-below.

इतनी मौतें और सारी ज़िम्मेदारी किसी और पर फेंकने की स्वस्थ परम्परा

सत्तर से ज़्यादा लोग मर चुके हैं, इतने ही गम्भीर रूप से घायल हैं। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार ट्रैक से पचास मीटर दूर रावणदहन चल रहा था, पटाखे फटे तो लोग आवाज़ के कारण दूर होने लगे। उसी चक्कर में लोग ट्रैक पर आ गए। ट्रैक पर दूर से आती ट्रेन के ड्राइवर को क्लियर सिग्नल मिला हुआ था। हॉर्न बजाया, किसी को सुनाई नहीं दिया। ट्रेन आई, और चली गई।

कुछ लोगों के अनुसार ये आयोजन बीस साल से चल रहा था। कुछ लोगों के अनुसार आयोजक स्टेशन मास्टर को 'मैनेज' कर लेते थे और ट्रेन का परिचालन चार-पाँच घंटे तक रोक दिया जाता था। कुछ लोगों के अनुसार ट्रैक पर आ जाना एक नॉर्मल बात है जिसका ख़्याल रेलवे को रखना चाहिए।

इस तरह की सारी सूचनाओं को पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि रेलवे का इसमें कोई दोष नहीं है। वहाँ के प्रशासन से सीधे शब्दों में किसी भी तरह की जाँच से मना कर दिया है कि भीड़ का ट्रैक पर आना 'ट्रेसपासिंग' है, और इस पर आगे कोई जाँच नहीं होगी। ये बिलकुल सही बात है कि रेलवे की प्रॉपर्टी पर बिना इजाज़त आप आ रहे हैं, तो किसी भी दुर्घटना के लिए आप ही ज़िम्मेदार होंगे।

कई विडियो में यह भी दिख रहा है कि लोग रावणदहन के पटाखों से बचने के लिए नहीं, दूर से उसका विडियो बनाने, और सेल्फी लेने में व्यस्त थे। ये सारा काम ट्रैक पर से हो रहा था। तस्वीरों में दिख रहा है कि लोग रावण के जलने से पहले से ही ट्रैक पर थे, और फोटो आदि ले रहे थे। इसलिए यह तर्क भी नाकाम ही है कि आग लगी तो लोग बचने के लिए इधर-उधर फैल गए। सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी यह जानता है कि जब पुतले में आग लगाई जाती है तो लोग पहले से ही एक निश्चित दूरी बनाकर खड़े होते हैं। लेकिन इस मामले में भी रेलवे ट्रैक को पार्क समझकर लोग कहीं भी खड़े थे। 

दुर्घटना हो गई, उसके बाद क्या हुआ? उसके बाद वही हुआ जो सिर्फ भारत में होता है। बाकी जगहों पर पुलिस और बाकी एजेंसियाँ जाँच के लिए आती हैं, लोगों को सबसे पहले वहाँ से बचाती हैं, इलाके को जल्द से जल्द खाली कराती हैं, और ट्रेन के आवागमन को ज़ारी कराती हैं। लेकिन भारत में हर दुर्घटना के बाद विडियो बनाने वाली जनता ट्रैक पर आ जाती है। उसके बाद आगे और पीछे की ट्रेन कैंसिल कर दी जाती है। 

यानि कि, एक दुर्घटना के कारण एक दूसरी भीड़ सिर्फ अपने कौतूहल को शांत करने के लिए लाखों लोगों की असुविधा का कारण बनती है। और ये सब मान्य है क्योंकि ये भारत है। ये भारत है जहाँ सड़क पर दुर्घटना होती है तो धक्का मारने वाली कार के भागने के बाद आने वाली दूसरी और चौथी कार को लोग आग लगा देते हैं, ट्रकों का सामान लूट लेते हैं, और सड़क जाम कर देते हैं। 

जबकि, आप बैठकर सोचिए कि इससे होता क्या है, तो आपको एक सही जवाब नहीं मिलेगा। किसी की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई तो उसका संबंध या समाधान सड़क जाम करने, दूसरी गाड़ियों में आग लगाने से कैसे है? कोई ट्रेन दुर्घटना हो गई है तो सबसे ज़रूरी बात ट्रैक को साफ करके, ट्रेन का परिचालन सामान्य करना है या फिर हजार लोगों का ट्रैक पर आकर परिचालन रोक देना?

आप कहेंगे कि लोगों में गुस्सा होता है, वो अपने प्रियजनों को ढूँढते हुए आ जाते हैं। अब आप यह भी बता दीजिए कि पुलिस की मदद में ये भीड़ कितना काम करती है? इस भीड़ से कितने आदमी लाशों को जल्दी हटाने में मदद करते हैं? लाशों की शिनाख्त तो तब ही हो पाएगी जब उसे सही जगह पर पहुँचाया जाएगा? या फिर एक तमाशबीन भीड़ वहाँ अपने फोन निकालकर विडियो बनाती रहे, और घंटों तक ट्रैक को इस लायक न छोड़े कि वहाँ से ट्रेन को पास कराया जा सके?

तमाम बातें हो रही हैं जिसमें आयोजकों के कॉन्ग्रेस पार्टी का नेता होने से लेकर, नवजोत कौर के आने और बीस साल से हो रहे आयोजन का हवाला देकर इस भीड़तंत्र का बचाव किया जा रहा है। कोई नहीं चाहता कि लोग मर जाएँ, हर मौत दुःखद है लेकिन इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि आपकी मूर्खता का ठीकरा सरकार और प्रशासन पर फूटे क्योंकि सरकार और प्रशासन नाम की चीज़ें होती हैं। 

किस तर्क के आधार पर रावण को जलते देखने का मनोरंजन रेल लाइन पर खड़े होकर करना सही लगता है? भीड़ें कब तक अपने भीड़ होने का गुनाह सरकारों पर फेंकती रहेंगी? चूँकि सौ लोग, बीस साल से कोई गलत कार्य कर रहे थे, तो वो गलत कार्य सही नहीं हो जाता। ये होना ही था, और इस साल हो गया। 

अब आप इसमें लोकल कॉन्ग्रेस सरकार बनाम भाजपा की रेलवे का एंगल ले आइए, लेकिन उससे सिवाय आपके कुतर्कों की मूर्खता के कुछ सामने नहीं आएगा। जब कोई ओवरस्पीडिंग के कारण मरता है, शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए दुर्घटना का शिकार होता है, रेलवे के बंद फाटक के नीचे से निकलते हुए कटता है, बीच सड़क पर ट्रैफिक से बचकर निकलते हुए हाथ-पैर गँवाता है, तो चाहकर भी मेरी संवेदना ऐसे लोगों के साथ नहीं हो पाती।

कुछ लोग कह रहे हैं कि आयोजक बता देते तो ट्रेन धीमे कर दी जाती, या स्टेशन मास्टर को ध्यान रहता तो वो रुकवा देता। क्यों? कुछ सौ लोग वहाँ दशहरा मना रहे हैं, इसलिए कई हजार लोग जो टिकट लेकर ट्रेन में बैठे हैं उन्हें असुविधा पहुँचाई जाए? ये जो सड़कों पर काँवरियों का हुड़दंग होता है, शबेबारात पर मोटरसायकलों की जो स्टंटबाज़ी होती है, उसके कारण हुई असुविधा भी ज़ायज है? 

क्या आपने यह सोचा कि इतने लोगों के ट्रैक पर आने से ट्रेन पटरी से उतर जाती तो क्या होता? क्या आपने यह सोचा कि ड्राइवर के इमरजेंसी ब्रेक लगाने से कहीं ट्रेन अनस्टेबल होकर दुर्घटना का शिकार होती तो क्या होता? क्या आपने यह सोचा कि ट्रेन में बैठे लोगों को कुछ हो जाता तो उसकी ज़िम्मेदारी किसकी होती? आपने नहीं सोचा क्योंकि भीड़ जो भी करती है, वो उसका लोकतांत्रिक अधिकार जैसा लगता है। आज के माहौल में भीड़ें अधिकांशतः गलत जगह पर, गलत समय में, गलत बातों के साथ खड़ी दिखती है। 

मतलब, हम यह मानने को तैयार हैं कि भीड़ का ही चलेगा इस देश में, भले ही उससे बड़ी संख्या में आ-जा रहे लोगों को असुविधा होती रहे? ये ब्लेम दूसरे के माथे पर फेंकने से बेहतर है कि हम अपनी आदतों को सुधारें। आप चाहते हैं कि देश और समाज चकाचक हो जाए, सबकुछ व्यवस्थित और सुचारु रूप से चले, लेकिन मन के कोने में आपको मूर्ति-विसर्जन का सड़क जाम अच्छा लगता है क्योंकि आप उसमें अबीर फेंककर नाच रहे होते हैं। 

भीड़ का एन्ज्वॉयमेंट तभी तक अच्छा लगता है जब तक हम उस भीड़ का हिस्सा होते हैं। भीड़ का हिस्सा सिर्फ शारीरिक रूप से उस भीड़ में होना ही नहीं है, उसका हिस्सा आप तब भी हैं जब आपको लगता है कि अमृतसर में जो हुआ उसमें भीड़ की गलती नहीं थी। आप उस भीड़ का हिस्सा तब भी हैं जब आप ये लिखते हैं कि 'भीड़ की गलती तो है लेकिन...'। लेकिन क्या? 

क्या सौ-हज़ार लोग इकट्ठा होकर कुछ भी कर लेंगे और प्रशासन लाचारी से देखता रहे क्योंकि ये भीड़ फ़लाँ नेता की है, फ़लाँ धर्म वालों की है, फ़लाँ जाति वालों की है? 

हम लोग उस समाज से हैं जहाँ हम उन शब्दों पर ही सबसे ज़्यादा पेशाब करते हैं जहाँ लिखा होता है कि 'यहाँ पेशाब करना मना है।' हम उस समाज से हैं जहाँ रेड लाइट जम्प करना एक अचीवमेंट माना जाता है। हम उन दोस्तों के बीच बैठते हैं जो हमें यह बताते हैं कि कैसे उन्होंने फलाना कानून तोड़ा और बच निकले। 

इसलिए, संवेदना सही जगह और योग्य लोगों/घटनाओं के लिए बचाकर रखिए। ये मौतें संवेदनशील हैं, लेकिन संदर्भ जानकर मेरी संवेदना इनके साथ कभी नहीं हो पाएगी। 


*#AmritsarTrainAccident*




Saturday, September 22, 2018

Dirty Trick War Against Rafael Deal

Persons who say that present government  recommended name of Reliance Industry to France defense company Dassault  should read this news published in Economic Times in Fab 2012 that is more than six years ago when UPA GOVT was in power and Modi was not at all in picture so far as national issues were concerned. Link given below.

Leaders of Congress party believe that if they speak lie hundred times , their lie will become truth. They steal and loot money and when police comes on the spot ,they start shouting  'Chor Chor' to mislead police. 

This ill  culture and  such dirty tricks used by Congress Party will ensure complete elimination of the party from Indian politics. They are already cut to size from 400 to 40.
 It is pity that every small or regional  party at state level dictate term to this 125 year old Congress party.  The party is headed by a joker and it is pity that none of so called stalwarts  in the party has the guts to speak against Gandhi family even though RG speaks lie and acts as a comedian.

Leaders of this national party has breached all limits of civic senses and indulge openly in mud slinging proocess without any shame feeling. Unfortunately  some small parties at state level also support their nonsensical attitude only because there is mad rush for power.

There are some blind followers of congress party, there are some Modi haters and there are some anti nationals who are using all types of false propaganda to tarnish rising and relentlessly shining  image of Modi all over the world. Enemies of Modi and BJP have united to serve their selfish interests. They do not  feel hesitation even in speaking on defense related matters which directly give advantage to enemy country  like Pakistan and China. SOME of them speak the way as if they are agents of Pakistsn or China or agents of anti national forces .It appears that they for the sake of  power can compromise with all laws of ethics and international code of conduct. They want power by hook or by crook.

 It is pity and ridiculous  that some media men for sake of TRP or to serve their ill  motivated promoters blindly extend support to RG called as Pappu and his flatterer gang without bothering of  national safety and security. They should in fact take care of national interests at all cost.

News published in Economic  Times in Fab 2012 says , "Days after bagging the multi- billion dollar MMRCA deal, French defence major Dassault Aviation has entered into an agreement with Reliance Industries Limited for partnering in defence and homeland security sector in the country". If this news is also fake then only God can save us .





Message received on WhatsApp is as follows


राफ़ेल रिलायंस का संयुक्त उद्यम: ओलांद, भृष्ट मीडिया, कांग्रेस व रूस का षडयंत्र
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कल भारत की मीडिया ने एक भूचाल को जन्म दिया है। प्रेस्टिट्यूएस मीडिया के नाम से कुख्यात 'द वायर', 'द प्रिंट', 'एनडीटीवी' में एक साथ यह खबर आई कि फ्रांस के भूतपूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया है की राफ़ेल डील में इस युद्धक विमान के कल पुर्जे बनाने के लिये, भारत सरकार ने रिलाइंस का नाम दिया था। 

इस ब्रेकिंग न्यूज़ का असर यह हुआ कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर लोगो ने वर्तमान की भारतीय सरकार, विशेषतः मोदी जी पर व्यक्तिगत रूप से 'राफ़ेल घोटाला' का नाम लेकर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया है। 

कल जब यह विस्फोट हुआ था तब मुझको देख कर कोई भी आश्चर्य नही हुआ था कि इस खबर को जिन लोगों ने बढ़ाया है और उनकी देखा देखी, जो और लोग कूद पड़े है उन किसी ने इस समाचार की हेडलाइंस से ज्यादा जाकर कुछ भी अन्वेषण नही किया था। इस सबको देख कर मेरा विश्वास और भी सुद्रढ़ हो गया थी कि राफ़ेल सौदे को लेकर जो आग लगाई गई उसके पीछे का सच जरूर कुछ और होगा क्योंकि इसको लेकर उड़ा भ्रष्ट्र राजनैतिक समुदाय, जिसकी अगुवाई 5000 करोड़ के नेशनल हेराल्ड घोटाले में जमानत में बाहर निकले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और एनडीटीवी व शेखर गुप्ता कर रहे है।

आज सब राफ़ेल पर फ्रांस के भूतपूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने जो कहा उस पर बात कर रहे है और मोदी जी भृष्टाचार का आरोप लगा रहे है लेकिन क्या किसी ने ओलांद का इंटरव्यू पढा या सुना है? मैं कल से इसको खोज रहा हूँ लेकिन मुझ को नही मिला है। फिर यह है क्या? यदि लोग इस समाचार को बिना पूर्वाग्रह के पढा होता तो हमेशा की तरह वे एक बार फिर अविश्वसनीय मीडिया की बात पर तुरन्त विश्वास कर के हुयाँ हुयाँ नही करने लगते।

यह सारा समाचार पैदा नही बल्कि बनाया गया है। यह समाचार ठीक वैसे ही बनाया गया है जिस तरह राफ़ेल को बनाने वाली कम्पनी दासौ एविएशन ने रिलायंस के साथ वायुयान के कलपुर्जे बनाने के लिए जॉइंट वेंचर बनाया था। फ्रांस में एक खोजी पत्रकारिता के नाम पर वेबपोर्टल है जिसका नाम है मीडियापार्ट.एफआर जो अपने पाठकों के सब्क्रिप्शन पर चलता है। उसके संपादक एडव्य प्लेनेल ने एनडीटीवी को दिये गए एक साक्षत्कार में बताया कि जब वे फ्रांस के भूतपूर्व राष्ट्रपति ओलांद पर एक कहानी कर रहे थे तब ओलांद ने बताया कि भारत की सरकार ने, राफ़ेल सौदे में भारतीय पार्टनर के रूप में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम सामने रखा था।

यहां यह महत्पूर्ण है कि मिडियापार्ट के सम्पादक ने ओलांद के साथ हुये किसी भी इंटरव्यू को सामने नही रक्खा, सिवाय इसके की उनके पास पर्याप्त सबूत है। अब जो राफ़ेल का नरेशन चल रहा है उसमे कही भी इस संपादक का जिक्र नही हो रहा है सिर्फ ओलांद ही चल रहा है। एनडीटीवी के अपने साक्षात्कार में प्लेनेल ने भारत सरकार कहा है लेकिन अब उसमे भारत गायब हो गया है और मोदी जुड़ गया है। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि ओलांद से यह प्लेनेल कि कब बात हुई इसका कोई जिक्र सामने नही आया है। 

मैंने स्वयं https://www.mediapart.fr/ को खंगाला है लेकिन उनके यहां किसी भी जगह इस बात का कोई जिक्र नही आया है। यह बेहद आश्चर्यजनक बात है कि इतनी बड़ी खबर, जिसकी खबर पर भारत मे खबर बनाई गई है उसका मूल साइट पर कोई जिक्र नही है? हां, वहां ओलांद और रिलायंस को लेकर एक खबर जरूर है जिसमे यह बताया गया है कि ओलांद की प्रेमिका, फ्रेंच अभिनेत्री जूली गये की फ़िल्म 'आल इन द स्काई' जो एवरेस्ट चढ़ाई के दौरान मारे गए फ्रेंच पर्वतारोही मारको सेफर्डी पर आधारित थी को अनिल अम्बानी की रिलायंस एंटरटेनमेंट ने फाइनेंस किया था। 10 मिलियन यूरो के बजट की फ़िल्म में अनिल अंबानी की सहभागिता पहले 3 मिलियन की थी जो अंत मे सिर्फ 1.6 मिलियन यूरो की रह गयी थी।

आज जब यह लिख रहा हूँ तब तक फ्रेंच सरकार व दासौ एविएशन के आधिकारिक बयान आगये है और ओलांद के नाम पर जो कहा गया उसको आधिकारिक रूप से नकार दिया गया है। 

आज जब मीडिया राफ़ेल सौदे पर बात कर रही है तब यह बात नही बता रही है कि रिलायंस डिफेंस और दासौ एविएशन के बीच 2012 को साझेदारी हो गयी थी, जो अम्बानी परिवार में बंटवारे के बाद 2013 में अनिल अंबानी के हिस्से में आई थी। दासौ एविएशन ने यह जरूर बताया है कि उन्होंने रिलायंस डिफेंस को 2013 में ही चुन लिया था। *यहां सबसे विशेष बात यह है कि दासौं एविएशन ने,  रिलायंस डिफेंस की तरह 72 कम्पनियों के साथ साझेदारी की लेकिन उस पर सब चुप है? काइनेटिक,महेंद्रा, मैनी इत्यादि कम्पनियों के साथ दासौं ने कांग्रेस के सैम पित्रोदा की 'सैमटेल' भी शामिल है लेकिन कांग्रेस व मीडिया चुप है?* 

आज मीडिया यह भी नही बता रही है कि प्लेनेल का ओलांद के साथ साक्षात्कार कब हुआ था और क्या उन्होंने प्लेनेल के कथन के प्रमाण देखे है? मीडिया इस पर इस लिये बात नही कर रही है क्योंकि यह साक्षत्कार 2012/13 में लिया गया था को एक ब्लॉग में सामने आया था। उस वक्त ओलांद फ्रांस के राष्ट्रपति थे और भारत मे मनमोहन सिंह की यूपीए की सरकार थी और राफ़ेल सौदे की शुरुआत हुई थी। 

*अब इन सब तथ्यों के आधार पर क्या मीडिया और विपक्ष भारत की जनता को यह समझाना चाहता है कि, 2012/13 मे तब के फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिलायंस के लिये कहा था?*

यदि तथाकथित ओलांद के बयानों को संदेह का लाभ दे भी दिया जाय तो क्या इसका मतलब यह नही है कि 'भारत की सरकार' का तात्पर्य, 2012/13 में सोनिया गांधी की अध्यक्षता में मनमोहन सिंह की भारत मे सरकार थी, उससे था? 

आज जब इतने सारे तथ्यात्मक सूचनाये सामने आगयी है तब इसमें कोई संदेह नही रह गया है कि एक एजेंडे के तहत विदेश से बिना किसी तथ्य को सामने रख कर लीक की गई सूचना से भारत की मीडिया और कांग्रेसी इकोसिस्टम ने ब्रेकिंग न्यूज़ पैदा कर दी है। *यह दरअसल रूस में व्यक्तिगत यात्रा पर गई सोनिया गांधी का रूस के सहयोग से प्रयास है। भारत ने जब से रूसी युद्धक सामग्री पर अपनी आत्मनिर्भरता को कम किया है तब से भारत की राफ़ेल सौदे को विवादों में घेरने की कोशिश होती रही है। रूस अपने सुखाई 30 को बेचने में बहुत पहले से लगा हुआ था लेकिन मोदी सरकार द्वारा राफ़ेल का बड़ा सौदा करना उसके लिये बड़ा झटका था। इसके लिये रूस ने सोनिया गांधी की तरह एक और हारे सोशलिस्ट पार्टी के राजनैतिज्ञ फ्रांस के भूतपूर्व राष्ट्रपति ओलांद, जो वामपंथी राजनीति करते है, को बढ़ाया गया जो अपने कार्यकाल में इतने बदनाम हुये थे कि उन्होंने 2017 में चुनाव ही नही लड़ा था।*

यह राफ़ेल सौदा सिर्फ मोदी जी की सरकार पर भृष्टाचार का आरोप लगाने का हथियार नही है बल्कि विश्व की युद्धसामग्री बेचने वालों के लिए हथियार है। यह मोदी जी की सरकार को बदनाम करने का षडयंत्र है क्योंकि मोदी जी की सरकार ने बिचौलियों का धंधा और दोयम दर्जे की सैन्य सामग्री खरीदने की परिपाटी की बन्द कर दिया है जिससे कांग्रेस व भृष्ट मीडिया को मिलने वाली औक़ातनुसार मलाई मिलना भी बन्द हो गयी है।

*आज कांग्रेस समेत विपक्ष व भृष्ट मीडिया मानसिकता व आचरण से इतना विच्छिप्त हो चुके है कि उनके लिये भारत के अस्तित्व से बहुत ज्यादा उनका अस्तित्व महत्वपूर्ण है और वे इसके लिये अपनी बिकी हुई आत्मा से भारत के कण कण को बेचने से भी नही हिचक रहे है।*

#copied





Light mode



𝗠𝘂𝘀𝘁 𝗞𝗻𝗼𝘄 𝗤𝘂𝗲𝘀𝘁𝗶𝗼𝗻 & 𝗔𝗻𝘀𝘄𝗲𝗿𝘀: 

A must read for all, especially the highly tolerant folks. 

 *Q1: When did poverty begin in India?* 
Answer: 26th May 2014
Before that the poor were roaming around in expensive cars and drinking cold coffee.

 *Q2: When did the crooked media and some religious institutions lose trust in Indian Democracy?* 
Answer: 26th May 2014

 *Q3: When did Ambani and Adani become rich* ?
Answer: 26th May 2014
Before that they were begging on Mumbai roads.

 *Q4: When did Petrol and Diesel Prices increase* ?
Answer: 26th May 2014
Until the day before that, petrol was sold at 14 Rupees per Litre.

 *Q5: When did Kashmir issues start?* 
Answer: 26th May 2014
Until then all the terrorists were messengers of peace. They used to distribute chocolates to kids in the valley.

 *Q6: When did India's issues with China and Pakistan start?* 
Answer: 26th May 2014
Before that Pakistan and China treated Indians with lots of love. They used to even hug and kiss Indians whenever they saw them.

 *Q7: When did people realize that there is illegal money stashed abroad in foreign banks?* 
Answer: 26th May 2014
Indians were never aware of Black Money until then. They thought black money is money painted in black ink for recreational purposes.

 *Q8: When was the word "Intolerance" invented?* 
Answer: 26th May 2014
This word was added to the dictionary only then. Until then people didn't even realize such thing exists nor felt it.

 *Q9: Who broke into the Parliament at midnight and started ruling India without the people voting for him?* 
Answer: Narendra Modi

 *Q10: Who was the first Indian PM to do foreign trips on flights?* 
Answer: Narendra Modi
Before this, Indian PMs used to travel in Bullock Carts to other countries.

🙂👆🏼🤔👆🏼😇👆🏼😂👆🏼🤣

Wednesday, September 19, 2018

Threats to India and Possibility Of Third World War

Posted as received.
*तीसरा विश्वयुद्ध और भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तैयारियां*

(आलेख थोड़ा बड़ा है, लेकिन एक पैरा पढ़ लिया तो फिर आखिरी तक छोड़ नहीं पाएंगे। हर भारतीय को इसे जरूर पढ़ना चाहिए)

तीसरा विश्वयुद्ध कैसे होगा और इसमें भारत और मोदी की क्या भूमिका होगी और ये मोदी देश को जलता छोड़कर बार-२ विदेश में काहे को जाता है जैसे सवालों का जवाब देता देवेन्द्र सिकरवार जी का लेख जो जिसने नहीं पढ़ा उसने '' कल क्या होने वाला है '' को आज ही जानने का अवसर खो दिया
" The Great Game "

विशेषज्ञों की मानें तो पृथ्वी के संसाधन अब चुक रहे हैं जिसमें फिलहाल दो चीजें सबसे मुख्य हैं --
.............." पैट्रोल और पानी "...............
वर्तमान जंग पैट्रोल की है और भविष्य का संघर्ष पानी को लेकर होगा और इसमें दो धड़े होंगे --
----------- चीन v / s अमेरिका ---------
-अब इसमें शेष विश्व और भारत की क्या स्थिति है ? -विश्व राजनीति की शतरंज में महाशक्तियां अपने -क्या क्या मोहरे चल रहीं हैं ?
-भारत की स्थिति क्या है ?
-क्यों मोदी ताबड़तोड़ विदेश दौरे कर रहे हैं ?
*
संसाधनों की इस होड़ में हम कहाँ हैं ?
आपको बुरा लगेगा पर सत्य ये है कि कहीं नहीं ।
क्यों ?
क्योंकि आजादी के बाद के 15 साल हमने नेहरू की नासमझ विदेशनीति की भेंट चढ़ा दिये और तिब्बत जैसे कीमती संसाधन को खो दिया वरना आज चारों ओर से भारत से घिरा नेपाल भारत का हिस्सा बन चुका होता और हिमालय के पूरे संसाधनों पर हमारा कब्जा होता ।
इसके बाद से शास्त्री जी के लघु शासनकाल को छोड़कर शेष समय सरकारें विशेषतः गांधी खानदान बिना भविष्य की ओर देखे सिर्फ " प्रशासन के लिये शासन " करते रहे जिसमें जनता सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिये वोटों की संख्या और उनकी विलासिता के लिये ' उत्पादक ' मात्र थी ।
दूसरी ओर विशाल और बढती हुई जनसंख्या जिसके लिये इतने संसाधन जुटाना असंभव भी है खासतौर पर जब देश में बहुसंख्यकों के प्रति शत्रु मानसिकता रखने वाली 20 करोड़ से ज्यादा की जनसंख्या व एक छोटा पर बहुत प्रभावी कुटिल बिका हुआ देशद्रोही बुद्धिजीवी वर्ग हो जो राष्ट्रहित की प्रत्येक नीति में रोड़े अटकाता हो ।
भारत की स्थिति : तो कुल मिलाकर भारत इस
समय अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहा है ।
-- दक्षिण में हिंद महासागर की तरफ से भारत सुरक्षित है पर यह स्थिति दिएगो गर्सिया पर काबिज अमेरिका पर निर्भर है |
-- पश्चिम में पाकिस्तान
-- पूर्व में बांग्लादेश
-- उत्तर में स्वयं चीन
-- ' पांचवीं दिशा ' का खतरा सबसे भयानक है और भारत के अंदर ही मौजूद है । 20 करोड़ की भारत विरोधी सेना ।
-- कश्मीर में पूरी तरह बढ़त में , केरलमें निर्णायक ,
-- पूर्वोत्तर , असम व बंगाल में प्रबल स्थिति में ,
-- उत्तरप्रदेश और बिहार में वे कांटे की टक्कर देने की स्थिति में है ।
--शेष भारत में भी वे विभिन्न स्थानों पर परेशानी खड़ा करने की स्थिति में हैं ।
**** केरल में तो वे " पॉपुलर फ्रंट " के नाम से वे सैन्य रूप भी ले चुके हैं ।
ये वामपंथी , ये अरुंधती टाइप के साहित्यकार , भांड टाइप के अभिनेता और महेश भट्ट जैसे एडेलफोगैमस लोग , बिंदी गैंग आदि सऊदी पैट्रो डॉलर्स और चीन के हाथों बिके हुये वे लोग हैं जो मोदी का रास्ता रोकने के लिये देशविरोधी घरेलू और विदेशी शक्तियों का ' हरावल दस्ता ' है ताकि मोदी की गति कम करके इस ' Great Game ' में पछाड़ जा सके ।
Now great game is near to start -----
भारत को छोड़कर शेष विश्व इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हो चुका है और अब वो मृतप्रायः है इस्लाम का संकुचन अरब देशों में पैट्रोल के खतम होते ही प्रारम्भ हो जायेगा ।
अब मारामारी शुरू होगी पानी के ऊपर और दुर्भाग्य से इसकी शुरूआत भारत से ही होगी क्योंकि चीन ना केवल ब्रह्मपुत्र नदी पर अपनी निर्णायक पकड़ बना चुका है बल्कि यह तक कहा जा रहा है कि हिमालय क्षेत्र के मौसम और ग्लेशियरों को प्रभावित करने की टेक्नोलॉजी विकसित कर चुका है ।
चीन की तीन कमजोरी हैं --
1--निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था
2--टेक्नोलॉजी
3--हिंद महासागर
पहली कमजोरी से निबटने के लिये चीन ने विदेशी मुद्रा का बड़ा भंडार और ट्रेजरी बॉन्ड खरीद रखे हैं जिसके जरिये वह अमेरिका के डॉलर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दो दिन में कौड़ियों के भाव का कर सकता है परंतु भारत के संदर्भ में उसका कदम उल्टा बैठेगा और साथ ही भारत चीन के माल पर किसी भी ' बहाने ' से रोक लगाकर उसकी अर्थव्यवस्था को गड्ढे में धकेल सकता है । इसलिये आर्थिक मोर्चे पर तो सभी पक्ष " रैगिंग वाली रेल " बने रहेंगे जिसमें झगड़ा बस इस बात का है कि " इंजन " कौन बनेगा और " पीछे वाला डिब्बा " कौन रहेगा ।
( मेहरबानी करके रैगिंग की रेल का मतलब ना पूछियेगा )
अब बात टेक्नोलॉजी की जिसमें चीन दिनरात एक किये हुए है पर मिसाइल और न्यूक्लियर टेक्नीक को छोड़कर वह पश्चिम के सामने कहीं नहीं टिकता विशेषतः सामरिक तकनीक के क्षेत्र में । इसीलिये चीन " पश्चिम की सामरिक तकनीक के गले की नस " अर्थात टेलीकम्यूनिकेशन को बर्बाद करने के लिये " सैटेलाइट किलर मिसाइल्स " का सफल परीक्षण कर चुका है जिसके जवाब में अमेरिका ने " नैनो सैटेलाइट " लॉन्च किये हैं ।यानि इस क्षेत्र में पश्चिम अभी भी भारी बढ़त में है परंतु चीन और पश्चिम दोनों ही जानते हैं कि टैक्नोलॉजी से चीन को रोका तो जा सकता है पर निर्णायक रूप से परास्त नहीं किया जा सकता ।
अब तीसरी कमजोरी ' हिंदमहासागर ' और उसमे भारत , अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का प्रभुत्व जिसके तोड़ के रूप में चीन ने " पर्ल स्ट्रिंग " विकसित की है जिसका एक सिरा पाकिस्तान स्थित ' ग्वादर बंदरगाह ' है तो दूसरा सिरा ' सेशेल्स ' में है । इसके बावजूद भारत अंडमान स्थित नौसैनिक अड्डे से पूरे हिंदमहासागर में चीन पर बढ़त में है और बाकी का काम मोदी ने ताबड़तोड़ विदेश दौरों और सफल कूटनीति से कर दिया । जरा याद कीजिये विदेश दौरों में देशों का क्रम और अबऑस्ट्रेलिया ,जापान , विएतनाम , भारत , दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के साथ एक हिंदमहासागरीय संगठन बनाने की कोशिश हो रही है जो चीन की ' पर्ल स्ट्रिंग ' का मुंहतोड़ जवाब होगी ।हालांकि ऑस्ट्रेलिया की झिझक के कारण इसका सैन्यस्वरूप विकसित नहीं हो पाया है ।
इस तरह चीन को घेरने के बावजूद अपनी " हान जातीयता " पर आधारित विशाल जनशक्ति के कारण पश्चिम उसपर निर्णायक विजय हासिल नहीं कर सकता । उसपर विजय पाने का एकमात्र तरीका जमीन के रास्ते से हमला करना ही है जिसके मात्र तीन रास्ते हैं ।
1- रूस द्वारा मध्य एशिया की ओर से
2- पाकिस्तान के रास्ते
3- भारत की ओर से
--अब आपको समझ आ गया होगा कि चीन रूस की खुशामद क्यों कर रहा है और क्यूँ अपनी पूर्वनीति के विपरीत सीरिया में रूस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ' एयर स्ट्राइक ' में भाग लेने को तैयार हो गया है । चीन का पूरा पूरा प्रयास रूस के साथ गठ बंधन करने का या कम से कम उसे ' न्यूट्रल ' रखने का होगा ताकि रूस की ओर से निश्चिंत हो सके ।
--पाकिस्तान की तरफ के रास्ते को चीन POK में सैन्य जमावड़ा करके और ग्वादर तक अबाध सैन्यसप्लाई की व्यवस्था द्वारा बंद कर चुका है । अगर सियाचिन पाकिस्तान के कब्जे में पहुंच गया तो चीन इस पूरे क्षेत्र को पूरी तरह " लॉक " कर देगा ।
--भारत के संदर्भ में दोनों पक्ष जानते हैं कि समझौता संभव नहीं क्योंकि ' तिब्बत की फांस ' दोनों के गले में अड़ी है । भारत को हतोत्साहित करने और सामरिक रूप से निर्णायक महत्वपूर्ण स्थानों को कब्जा करने हेतु ही वह अक्सर सीमा उल्लंघन करता रहता है ।
तो कुल मिलाकर ' भारत ' ही है जो चीन को रोकने के लिये पश्चिम का ' प्रभावी हथियार ' बन सकता है और यही कारण है कि पश्चिमी देशभारत में इतना ' इंट्रेस्ट ' दिखा रहे हैं ।
पश्चिम की इस विवशता को मोदी ने पकड़ लिया है इसीलिये संघर्ष से पूर्व 'अर्थववस्था और सैन्य टेक्नोलॉजी ' की दृष्टि से सक्षम बना देना चाहते हैं इसीलिये उनके दौरों में निरंतर दो बातें परिलक्षित हो रहीं हैं - आर्थिक निवेश और हथियारों की ताबड़तोड़ खरीदी के साथ सैन्य टेक्नोलॉजी का हस्तांतरण ।
इसी तरह कूटनीतिक विदेश दौरों के द्वारा लामबंद करते हुए चीन विरोधी पूर्वी देशों का संगठित करने की कोशिश करते हुए चीन के ' पर्ल स्ट्रिंग ' को तोड़ दिया है जिससे चिढकर ही चीन ने नेपाल में मधेशियों के विरुद्ध माहौल खड़ाकर भारत के नेपाल में बढ़ते प्रभाव को रोका है और इसका असर मोदी पर इंग्लैंड दौरे के दौरान दिखाई दिया ।
भारत की तैयारियां --
1-- भारी मात्रा में निवेश को आमंत्रित करना ।
2-- आर्थिक मोर्चे पर सुदृढ़ता हासिल करना ।
( सेनायें भूखे पेट युद्ध नहीं कर सकतीं )
3-- नौसेना का आधुनिकीकरण
4-- वायुसेना को एशिया में सर्वश्रेष्ठ बनाना और उज़्बेकिस्तान में भारत के सैन्य हवाई ठिकाने को मजबूत बनाना
5-- अंतरमहाद्वीपीय तथा मल्टीपल वारहैड मिसाइलों का विकास व आणविक शस्त्रागारों का विकास ।
6-- बलूचिस्तान व अफगानिस्तान में भारत के प्रभाव को बढ़ाना ।
7-- इलैक्ट्रोनिक वार के लिए " काली 5000 " जैसी तकनीक का उन्नतीकरण ।
8-- अंतरिक्षीय संसाधनों के उपयोग की संभावनाओं के मुद्देनजर " मार्स मिशन " व अन्य " अंतरिक्ष कार्यक्रमों " का संचालन ।
पर इतनी तैयारियों के बावजूद अभी भी भारत बहुत पिछड़ा हुआ है और पश्चिमी शक्तियों के ऊपर निर्भर है और उसे निर्भर रहना पड़ेगा ।
अब कल्पना कीजिये कि भारत में किसी भी मुद्दे पर देशव्यापी दंगे शुरू हो जाते हैं और उसी समय पाकिस्तान भी अघोषित हमला शुरू कर देता जिसे समर्थन देते हुये चीन भी अपने दावे के अनुसार अरुणाचल पर कब्जा कर लेता है और लद्दाख में भी घुस जाता है । अब बताइये भारत क्या करेगा ?
भारत के पास ले देकर 11 लाख रेगुलर आर्मी और 32 लाख रिजर्व आर्मी है जबकि चीन की वास्तविक सैन्य संख्या हमारी कल्पना से परे है । और फिलहाल चीन अपने खरीदे हुए भारतीय बुद्धिजीवियों द्वारा और सऊदी फंड से प्रायोजित मुस्लिमों व ' सैक्यूलर राजनेताओं ' द्वारा भारत में ही भारत के विरुद्ध ' अप्रत्यक्ष युद्ध ' छेड़ चुका है और इसका अगला कदम होगा ' गृह युद्ध ' जिसका एक लघुरूप हम पश्चिमी उत्तरप्रदेश में देख चुके है । अगर ये गृहयुद्ध शुरू होता है और यकीन मानिये वो होगा ही ' और यह होगा संसाधनों ' के लिये परंतु ' धर्म ' के नाम पर होगा । इस स्थिति का फायदा उठाने से पाकिस्तान नहीं चूकेगा और ऐसी स्थिति में अगर चीन भी मैदान में उतरा तो अमेरिका व पश्चिम को भी हस्तक्षेप करना पड़ेगा और यह तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआत होगी
तो पूरा परिदृश्य क्या हो सकता है --
एक तरफ चीन + पाकिस्तान + अरब देश
दूसरी ओर अमेरिका + इजरायल +यूरोप +जापान
रूस संभवतः तटस्थ रहेगा लेकिन अगर वह चीन के साथ कोई गुट बनाता है , चाहे वह आर्थिक गुट ( शंघाई सहयोग संगठन ) या सैन्य गुट ( जिसकी शुरूआत सीरिया में दिख रही है ) तो चीन बहुत भारी पड़ेगा ।
इस परिस्थिति में भारत के सामने अमेरिका के सहयोग करने के अलावा कोई चारा नहीं और ना ही पश्चिम के पास भारत जैसी विशाल मानव शक्ति है और यही कारण है कि पश्चिमी शक्तियां आज मोदी की तारीफों के पुल बांध रही हैं , भारी निवेश कर रहीं हैं ( बुलेट ट्रेन में जापान की उदार शर्तों के बारे में पढ़िये ) और सैन्य तकनीक का हस्तांतरण कर रहीं हैं जबकि इजरायल द्वारा चीन को " अवाक्स राडार " देने से मना कर दिया जाता है ।
मोदी की कोशिश है कि इस स्थिति के आने से पूर्व ही भारत को पश्चिम की 'आर्थिक व सैन्य मजबूरी ' बना दिया जाये और मोदी की सारी व्याकुलता , बैचैनी और तूफानी विदेश दौरे उसी " महासंघर्ष " की तैयारी के लिये हैं ना कि ' तफ़रीह ' के लिये ।
मोदी की कोशिश चीन से त्रस्त वियतनाम , म्यामां , मंगोलिया , इंडोनेशिया , जापान आदि देशों के साथ मिलकर आक्रामक तरीके से घेरने की भी है और पहली बार भारत ने चीन को विएतनाम सागर जिसे चीन दक्षिण चीन सागर कहता है , में दबंगई से अंगूठा दिखाया है । ये है मोदी की विदेश दौरों की कूटनीति का परिणाम ।
तो मोदी के नादान और अधीर समर्थको , समझ गये ना कि मोदी विदेश दौरे पर दौरे क्यों कर रहे हैं ?
तो दोस्तो --
- रामलला को कुछ दिन और तंबू में रह लेने दो
- कुछ दिन और गायमाता का दर्द बर्दाश्त कर लो
- कुछ दिन और समान संहिता का इंतजार कर लो
- कुछ दिन और कश्मीरी पंडितों की तकलीफ झेलो
- कुछ दिन और महंगी रोटी पैट्रोल से गुजारा करो
क्योंकि --
--पहले, भारत को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना है
--दूसरा , भारत को सैन्य महाशक्ति बंन जाने दो
-- तीसरा , भारत को आंतरिक शत्रुओं से निबटने लायक क्षमता हासिल करने दो ।
-- चौथे , तुम खुद अपने आपको गृहयुद्ध की स्थिति में दोहरे आक्रमण का प्रतिरोध करने लायक तैयार कर लो।
समझ में आ गया तो सही वर्ना!!??
Recrived

Friday, September 14, 2018

True Analysis Of Indian Politics By Sri JN Shukla

Interesting  enlightenment on Current Politics by Sri Jagat N Shukla

We were shocked to know from RBI  report on Demonetization that almost all 500/1000 notes in circulation at the time of demonetization had come back. It surprised innocent people as to where all black money went in.

Here, we must read the story of Dhanna Seth of Akbar era. He used to make money by manipulation. Here, in our society nothing could be changed without change in mindset of people. We are born manipulators.

There is no morality for self. Morality is just a surmon for others.

We all are busy to maximize our wealth & resources through all fair and unfair means. We don't mind poching nation. We don't mind grabbing. We are dishonest citizen to our own nation & people. We have 99.9% corruption civil servants, law enforcement authorities. Entire bureaucracy, with exception, is corrupt. We are faithful to corruption, bribe, gratification. We do out of way and out perform once my palm is greased.

 Given such a society, how do we expect fair & honest public leaders.

See, one thing is quite clear to not only people living in India, but on globe, that Modi is totally honest, hard working and decision taking Prime Minister of India, but all political thieves, dacoits, manipulators, corrupts have joined their hands togather to thwart Modi regime.

Who are they?
Are they really honest people?
Why don't we see their amassed wealth?
Why don't we question their resource or rationale to have such huge wealth?

We lived 70 years as independent nation and democracy. Still we are in grip of glitters of corrupt politicians and look to them for salvation of our problems.

Here I recall a story again.

Once Hitlar picked up one hen and went to his parliament with it. He started undressing the hen. The hen was restless. Hitlar threw it on ground. Hen was about in death condition. Then Hitlar dropped some grain before the hen. Hen started picking up grain. Now, Hitlar started walking and dropping grains. Hen followed Hitlar and continued picking grains.

Then Hitlar told his Parliament. This is in Democracy. First politicians undress people and then start giving subsidised grains, facilities etc to create followings as I have done to hen and now hen is doing to me.

 Is it not true in Indian context?

Is is not a best explanation with regard to Congress rules for over 60 years in this country?

Poverty, poors, under privileged, half fed or starved, illiterates, sickness, reservation, subsidised foods etc were necessary ingredients which made over 6 decades congress rules.

Forget all above, division of people on caste, creed, religion, sex, secularism, socialism etc. were another top up thing for rules.

Slogans were for poors, but policies were for privileged & influential classes, corporates etc.

 See, how Banks were made a point to loot by Manmohan-Chidambram duo. Banks are bleeding by NPAs over 9 lakh crore.

Whose wealth was it?

Was it not poor depositors/savers money which banks lended to unscrupulous corporates under govt patronage?

For this apathy and criminality, same set of people are raising their pointing finger on Modi govt. Who are defaulters: look to them and time when they were sanctioned loans. (J.N.Shukla, Allahabad, 15.9.2018)

Read followings of Dhanna Seth:

*Once Badshah Akbar's army was engaged in a prolonged war. As a result his royal wealth ("shahi khazana") was nearly exhausted.*

He asked Birbal, "How to replenish my wealth."

Birbal: "You can get it from Dhanna Seth.(merchant)."

Akbar was amazed as to how a trader/ merchant could have so much money. Still he went to Dhanna Seth.

Dhanna Seth told Badshah Akbar: "I have huge wealth, take as much as you want."

Akbar: "Dhanna Seth, How did you accumulate so much wealth. Tell me without any fear of punishment."

Dhanna: "I earned it by adultrating grains & spices."

Akbar got angry, he took all of Dhanna's wealth and ordered him that from then on he would collect the horse dung  in his royal stable. Dhanna agreed.

Years passed by. Again Akbar had to fight a long drawn battle. Again his royal wealth exhausted & again Birbal advised Akbar to go to Dhanna Seth for help.

Akbar wondered : "Birbal, I had ordered him to work in royal stable to collect horse dung, How on earth he can have such a wealth."

Birbal: "Badshah, you can ask him but only he can help you."

Akbar went to Dhanna. Dhanna gave Akbar huge wealth.

Akbar: "Dhanna Seth, I had earlier taken all your wealth, How did you accumulate it again?"

Dhanna: "From the stable - incharge  & horse attendants. They used to underfeed the horses. I threatened them that I will complain to Badshah that they did not feed horses enough, hence the horse dung quantity was less. So they bribed me to keep silent."

Akbar got very angry again & ordered Dhanna to start counting the waves at sea & returned to his Palace with Dhanna's wealth.

As luck would have it, Akbar fought another war, royal wealth emptied out and once again Birbal advised Akbar to go to Dhanna  Seth for help.

Akbar could not believe as to how Dhanna could earn so much by counting waves at sea.

Akbar asked Dhanna for the help.

Dhanna: "Badshah, Take as much as you want but this time around I will not change my profession."

Akbar: "Ok, but tell me how did you earn money by counting Water waves at sea? "

Dhanna: Very simple, I used to stop merchant's ships & boats far  away from sea shore. I showed them your orders that I  was counting waves & their ships & boats would disturb or break the waves hence their ships or boats should stay away. Badshah, these merchants then used to bribe me to let them reach the shore & unload their merchandise.

So Badshah understood that Dhanna Seth can earn by engaging in manipulations & bribery from any profession.

Saturday, August 25, 2018

Who May Replace Modi ? RG or Someone Else

I know and everyone know that RG is an empty vessel. He may be termed as a joker or comedian  . But the most painful and astonishing  is that 120 years old congress party having thousands of senior leaders are tolerating and accepting Pappu as their leader.

I may add here that it is not easy to play the role of a joker or a comedian. In fact he is not fit for that too. In fact he is totally a non serious leader who lacks in knowledge and poor in skill. He is not matured in any respect.

It will not be an exaggeration if someone says that he is actually a child with retarded growth. His physical age may be 50 but IQ level does not match even with that of 10 year age boy.

I sometime feel that some people holding high and responsible post or you may say that some experienced citizens are very much anxious to see RG as PM of this country. God knows what will be our fate and what will happen to this great country when person like RG become PM.

A section of People or media men in particular  may have hate feelings for Modi or BJP for some reason or the other, but it does not mean that we should replace Modi with a mindless person. We must have strong opposition in democracy.

 Unfortunately  he has failed in playing the role of key opposition party in parliament or outside Parliament and hence it will be very much risky to replace Modi with such person who is fact not more than a Pappu.

India may be broken into pieces if we do not have a strong leader who can do justice with common men and take our country to peak position in the international community. There is no doubt in it that anti national elements have spread their dirty network in every corners of this country and it is they who are crying more loudly under present regime.

We have to be alert all the time from such evil  forces and ill motivated groups. All those who oppose Modi are not anti nationals but those who are really anti nationals are using opposition parties to finish their agenda of destabilising this country. It is they who are spreading false news using social sites and TV channels n the name of freedom of expression.  We have to be cautious 365 days 24 hours from such dubious minded persons and entities.

Watch following video which gives indication about ill motivated plans of anti nationals.



Thursday, August 23, 2018

An Appeal TO Our PM on Reservation

I request our Prime Minister respectable Sri Narendra Modiji to give a call to SCST persons to voluntarily discard benefits available to them under reservation if they are capable, rich and well todo. And their this sacrificed quota may bè given to other deprieved class or to economically backward class of general category. This idea if executed in true spirit , will make them (SCST) as General category and help in stopping mad rush for demanding reservation for various group of person or for some caste or for a community.

I am very much confident this formula of volutarily discarding subsidies by afflurnt classs which our learned PM applied in gas subdidy and train reservation can also yield good results if applied in case of reservation too.

Here it is worthwhile to mention that our Constitution makers had made provision of reservation for certain caste people categorised as SC and ST only for ten years in anticipation that these poor class people will be made economically and socially equal during a span of 10 years.

But unfortunately due to some reason or the other, lakhs and crores of people have been added to reserved category during last seven decades which is opposite to what our learned constitution makers had visualised.

It is further painful that even affluent class of people has started demanding reservation for their class of people. Our society is not only facing great problem but division in society has increased to a painful extent. People of one class hate that of others which may slowly and gradually lead to a class war and social unrest. Politicians and Media men for their self interest will continue to exploit poverty of baçkward class people.

Due to vote bank oriented mindset of our politicians we cannot dream of eliminating provisions of reservation even if beneficiaries of reservations become stronger and richer than general caste people . And due to such imbalances and misuse of government policies, prople belonging to weaker and middle class of general caste group feel cheated and deprieved. They feel that government is doing injustice with them for fulfilling agenda of self interest of politicians.

Moreover it is undeniable fact that a country can prosper and grow only when it learns and implements honestly the policy of rewarding meritorious class of people. Otherwise intelligent people who have huge knowledge and potential to help India in growing will as hitherto continue to go abroad for better recognition and better salary.

There is feeling of resentment in both class of people, one who is beneficiary of reservation and one who is not. Both have their own reason and their ligic to justify their ideas. Media men will continue to add fuel to fire as usual for the sake of their TRP or to please their mentor political parties.

Lastly it is our Beloved PM who can take effective initiative to create social harmony and help India grow taking all class of people together. "Sabka sath sabka vikas"

Yours

Danendra
24.08.2016

Sunday, August 12, 2018

Why Modi Is Unbeatable???

By Sri Ram Krishnan
Why I love  Modi?

Do I think Modi is perfect ? NO.
Do I believe Modi doesn't make any mistake ? NO.
Do I believe Modi government has fulfilled all that we want ? NO
Do I feel he will make India like Europe or USA in his lifetime ? NO.
--------
But I stand by his side like a rock. Why ?

➤ Because I do believe he is doing whatever he can in a very honest, dedicated and committed way.

➤ Because I do believe he is giving his best to improve the country in all areas.

➤ Because I have seen that massive corruption at cabinet ministerial level has disappeared.

➤ Because I have seen that India has not witnessed any terror attack on civilians in last 4 years under his rule.

➤ Because I have seen him taking unpopular steps just to make sure subsidies and taxes reach to the poor people and not middlemen.

➤ Because I have seen him working hard to make sure India becomes a member of MTCR, Waassenar group, Australia group and achieving diplomatic successes which we couldn't think of in last many decades.

➤ Because he has pushed forward many reforms which are not going down well with people today, but will unleash a new India when the results of those reforms - structural, economic, infrastructural will be visible in next 8-10 years.

➤ Because I know even if he is not perfect, he is much better than Lalu Yadav. He is much better than Akhilesh Yadav. He is much better than Mayawati. He is much better than Mamata Banerjee. He is much better than Rahul Gandhi.
.
➤ He is a hard working person. He has no family or anyone after him. He has his shortcomings. Which man doesn't ? Anyone of you who keep abusing him, are you even a fraction of him in dedication, focus, integrity, hard work and getting things done !!
He is cleaner than all the names I took above. He is not corrupt. He is visionary. He has solutions to many problems (if not all).
.
➤ He may not make India like Europe or US in his lifetime however hard he tries. But atleast he is governing much better than previous regimes. Check macro and micro-economic parameters. Compare infrastructure growth. Compare core areas. Compare GDP growth. Compare wholesale and consumer inflation. Every single parameter is much healthier than before.
.
Yes there are problems. Governing a country as heterogenous and vast as India which has been reeling under problems since centuries is never a joke.

Now ask yourself - who can and who has the capability to solve your problems ?

Hardik ? Alpesh ? Jignesh ? Tejaswi ? Akhilesh ? Mayawati ? Mamata ? Lalu ? Yechury ? Kanhaiya ?
.
They all are baying for Modi's blood (not in literal sense), they grill him now and then. Have they ever suggested any single solution to the problem ? Have they ever suggested what steps will they take to solve the problems ? What is their vision ? What is their method ?
Negative politics bordering the line of activism is good. But it is never right for country when the alternative is absent.
.
That's why I am and I will stand with Narendra Modi Ji like a rock.

Top 10 achievements of Modi led NDA government

FOLLOWING are taken from other sites which explains key achievements.

The National Health Protection Scheme (NHPS) is one of the boldest initiatives of the Modi government. It will provide medical insurance cover of Rs 5 lakh to 500 million low-income Indians. The scheme is budgeted to cost around Rs 10,000 crore annually (though critics say the cost could exceed Rs 80,000 crore).
Set to roll out on October 2, 2018, it is a long overdue step towards providing universal medical care. Setting up tertiary rural healthcare centres is obviously crucial for the scheme to work on the ground. It is a challenge the government faces given the rudimentary health clinics in rural areas and the shortage of qualified doctors.
The other key achievement during the NDA government’s first four years in office is Mudra Yojana, under which loans are given to small entrepreneurs with little or no collateral. The scheme is designed to produce an army of self-employed who in turn will create employment through their entrepreneurial ventures.
Other standout successes have been the Jan Dhan Yojana, which has created over 312 million new bank accounts, the direct benefit transfer (DBT) scheme, which has significantly cut pilferage, and subsidised LPG cylinders for the poor. Beyond these is the absence of corruption in the higher echelons of the government.
That’s where the good news ends. Corruption at lower levels remains endemic. It proliferates at state and local levels




The four years of Modi government has set India on a transformational path to rapid development at a time when democracy and freedom are being challenged in many other countries.
The four major achievements in the four years of Modi government are:

Robust foreign Policy

PM Modi announced his arrival on the global diplomatic stage when he invited leaders in the Indian subcontinent to be part of his swearing-in ceremony. The world took notice, and four years down he has single-handedly created a respected space in the world order for India and himself. No mean achievement for someone who was shunned by the global community till he became India’s Prime Minister.
The most significant achievement in India’s foreign policy has been building a closer strategic relationship with the United States. For a country that has largely been hesitant in demonstrating and asserting its strategic interests in keeping with its rising power status, the re-naming of the United States’ Pacific Command to Indo-Pacific Command, has been a significant development.
India’s ‘Look East’ policy got a boost with the country strengthening its relationship with Japan, Vietnam and Australia, and in bringing them closer to align with India’s strategic goals.
Another significant achievement of India’s assertive diplomacy is in isolating Pakistan in the global community and shaming it for its role as a state sponsor of terrorism.
The Modi government has strengthened its relationship with Bangladesh, and is working hard to stave off economic assertion by China in the Indian subcontinent and the Indian Ocean region.

Transforming BJP into a pan-India party

From the time of independence, Jan Sangh, BJP’s earlier avatar, had struggled to establish itself as a strong political party capable of challenging the Congress party on a pan-India basis. BJP, under the leadership of former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee, did come close to providing a sustainable challenge but soon the Congress party was able to reassert its position as the dominant political force.
BJP’s resurrection as a pan-India political force began with Narendra Modi being chosen as the prime ministerial candidate during the 2014 general elections. His taking command of the party leadership and directing the electoral strategy against the UPA became the defining moment in Indian politics.
His dramatic victory, strong leadership, clear communications, and a no-nonsense approach has helped energize a placid bureaucracy into a pro-active one. Under his leadership the entire government today enjoys a corruption-free reputation. That’s a big achievement for a country where corruption had become institutionalized over the years.
Under UPA II, India seemed a nation without much strategic direction or robust domestic goals that were transformational and yet, uniting. PM Modi and his party have successfully transformed that perception. In a politically fragmented country with diverse, and often, conflicting interests, the Modi government has been able to instil and sense of confidence and pride among the people in the concept of a dynamic India. That’s a major achievement.

GST

The Goods and Service Tax (GST) introduced from July 2017 has been one of the most significant reforms of the Modi government. The implementing of GST has created a single common market in India by subsuming several different taxes into a single tax and applicable pan-India. The move has helped in removing the cascading impact of different taxes.
With the introduction of GST, states can expect their revenues to increase, especially those that do not manufacture goods and rely on supply from other states. In other words, the disadvantage of certain states over others stands negated. For a country the size of a continent, its impact on the economy will be transformational.
GST was first proposed in 2000 by the Atal Bihari Vajpayee government but differences cropped up with several states on revenue sharing formula. Several attempts were made to implement GST by the UPA I and II governments but failed.
At present, GST is a four-tier tax slab system and there are plans at reducing the number of slabs as the system stabilizes.
As India pursues 7 percent plus growth year on year over the next few years, GST will play a major role in achieving that goal.

Social Welfare Schemes at scale

The Modi government has demonstrated its penchant for undertaking ambitious social welfare schemes and delivering them at scale under tight timelines. The speed of implementation of the popular Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana (PMJDY) stands out for what the government can achieve if there is a commitment.
PMJDY is the world’s largest financial inclusion program aimed to bring the weaker and marginalized sections of society into the banking system, and enable them to receive financial benefits from the government directly into their bank accounts.
PMJDY ensures the traditional leakages and corruption in the system is completely eliminated, thus ensuring full benefit reaches the beneficiary. As on May 2018, 31.60 crore beneficiaries have been covered under the scheme. The total deposit collected as a result of their opening of savings account is Rs 81,203.59 crores. 23.80 crore have received RuPay Debit Cards and can now access ATMs.
Other countries are now studying the model to possibly implement similar projects.

Aadhaar

– the UIDAI project, is a 12-Digit Unique Identification Number given to Indian residents, based on their biometric and demographic data. It is the world’s largest ID system implemented. Started under the UPA II regime, the Modi government has significantly advanced its implementation. The Aadhaar Card allows the holder to use it as a Proof of Address though it does serve as proof of citizenship. As on November 2017, 1.19 billion Aadhaar cards had been issued, covering 99 percent of the population.

The National Health Protection Scheme (NHPS)

is a major initiative of the Modi government launched this year? NHPS aims at offer healthcare cover up to Rs 5 lakh per family for serious illnesses. With a budget of Rs 10,000 crore, the scheme aims to cover 10 crore families or 50 crore people belonging to economically weaker sections of society.
Besides providing a high quality of health care services to the poorest, the scheme will also have a transformational effect on the healthcare infrastructure in the country.

Swaach Bharat Abhiyan

is yet another initiative unmatched anywhere in the world? The program is a movement against open defecation and helps people build toilets in joint participation with the government. As of April 2018, 46,36,128 individual toilets and 306,064 community and public toilets, have been constructed across the country.
All set to wrap up an eventful term
The above are four major achievements among many that the Modi government has to its credit. The government remains highly proactive as it runs through its final year before the 2019 general elections. The people will be the final judge on voting day.